➤ तिजारा चेयरमैन चुनाव से पहले 18 पार्षदों को हरियाणा में रोके जाने का कांग्रेस ने लगाया आरोप
➤ हिमाचल से राजस्थान लौट रहे पार्षदों को चंडीमंदिर टोल के पास रोकने का दावा, पिंजौर थाने के बाहर धरना
➤ 35 सदस्यीय नगर परिषद में 18 पार्षदों के समर्थन का कांग्रेस का दावा, आज चेयरमैन पद पर होना है मतदान
राजस्थान के तिजारा नगर परिषद चेयरमैन चुनाव से ठीक पहले हरियाणा-हिमाचल सीमा क्षेत्र में सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया है कि हिमाचल प्रदेश से राजस्थान लौट रहे उसके समर्थन वाले करीब 18 पार्षदों को पंचकूला जिले के चंडीमंदिर-सूरजपुर टोल प्लाजा के पास हरियाणा पुलिस ने रोक लिया। कांग्रेस के अनुसार पार्षदों को बाद में पिंजौर थाने ले जाया गया, जिसके विरोध में राजस्थान से पहुंचे कांग्रेस नेता और पार्षदों के परिजन थाने के बाहर धरने पर बैठ गए।
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब तिजारा नगर परिषद के चेयरमैन पद के लिए 21 सितंबर को मतदान होना है। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के मुताबिक तिजारा नगर परिषद में कुल 35 वार्ड हैं और चेयरमैन के चुनाव में बहुमत का आंकड़ा 18 है। चुनाव परिणामों में 31 निर्दलीय, तीन भाजपा और एक कांग्रेस प्रत्याशी विजयी हुए थे।
कांग्रेस की ओर से बताया गया कि चेयरमैन चुनाव से पहले उसके समर्थन वाले पार्षदों को हिमाचल प्रदेश में बाड़ेबंदी में रखा गया था। पार्टी का दावा है कि मतदान में शामिल होने के लिए रविवार रात पार्षदों का काफिला हिमाचल से राजस्थान के लिए रवाना हुआ था। इसी दौरान हरियाणा की सीमा में प्रवेश करने के बाद चंडीमंदिर-सूरजपुर टोल प्लाजा के पास उन्हें रोक लिया गया।
चंडीमंदिर टोल के पास रोकने का दावा
तिजारा के कांग्रेस नेता इमरान खान ने आरोप लगाया कि पार्षदों की बस और उनके साथ चल रही करीब आठ गाड़ियों को टोल प्लाजा के पास पुलिसकर्मियों ने घेर लिया। कांग्रेस नेता के मुताबिक कार्रवाई के बाद पार्षदों को पिंजौर थाने ले जाया गया।
इमरान खान का यह भी आरोप है कि मौके पर पहुंची पुलिस की कुछ गाड़ियों पर नंबर प्लेट नहीं थीं, जबकि कुछ वाहनों की नंबर प्लेट कपड़े से ढकी हुई थीं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तत्काल उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्षदों की बस और उनके साथ चल रही गाड़ियों को पिंजौर थाने में खड़ा करवाया गया। इसके बाद राजस्थान से कांग्रेस नेता और पार्षदों के परिजन पंचकूला जिले के पिंजौर थाने पहुंचे और कार्रवाई के संबंध में जानकारी मांगने लगे।
थाने के बाहर कांग्रेस नेताओं का धरना
पार्षदों को रोके जाने की सूचना फैलते ही पिंजौर थाने के बाहर कांग्रेस नेताओं और समर्थकों की भीड़ जमा हो गई। कांग्रेस नेताओं ने पुलिस से यह स्पष्ट करने की मांग की कि पार्षदों को किस आधार पर रोका गया है और उन्हें कहां ले जाया गया है।
कांग्रेस नेताओं ने थाने के बाहर धरना दिया और पुलिस कार्रवाई के विरोध में नारेबाजी की। कांग्रेस का आरोप है कि मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी पार्षदों को रोके जाने के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं दे रहे थे।
कांग्रेस की ओर से पंचकूला के डीसीपी अदिति सिंह से संपर्क करने का प्रयास किए जाने की बात भी कही गई। उपलब्ध खबर के अनुसार कॉल का जवाब नहीं मिला और WhatsApp पर भेजे गए संदेश का भी तत्काल जवाब नहीं आया। पुलिस की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत आधिकारिक पक्ष इस समय उपलब्ध नहीं है।
तिजारा में क्यों अहम है 18 पार्षदों का आंकड़ा
तिजारा नगर परिषद का चुनावी गणित इस पूरे घटनाक्रम को महत्वपूर्ण बनाता है। नगर परिषद में कुल 35 वार्ड हैं। 14 सितंबर को घोषित चुनाव परिणामों में 31 निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे, जबकि भाजपा के तीन और कांग्रेस का एक उम्मीदवार जीता।
इस तरह किसी भी समूह को चेयरमैन पद के चुनाव में बहुमत के लिए 18 पार्षदों के समर्थन की जरूरत है। कांग्रेस का दावा है कि उसके एक निर्वाचित पार्षद के साथ 17 निर्दलीय पार्षदों का समर्थन है और इसी आधार पर करीब 18 पार्षदों की बाड़ेबंदी की गई थी।
यही वजह है कि मतदान से कुछ घंटे पहले इन पार्षदों के हरियाणा में रोके जाने की खबर ने तिजारा की स्थानीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।
आज होना है चेयरमैन पद का चुनाव
तिजारा नगर परिषद के चेयरमैन पद के लिए 21 सितंबर को मतदान निर्धारित है। उपलब्ध चुनावी कार्यक्रम के अनुसार मतदान सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक होना है और इसके बाद मतगणना की प्रक्रिया होगी।
ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि हरियाणा में रोके जाने का कांग्रेस द्वारा किया गया दावा किस स्थिति में समाप्त होता है और क्या संबंधित पार्षद निर्धारित समय तक तिजारा पहुंचकर मतदान में हिस्सा ले पाएंगे।
कांग्रेस की ओर से इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पार्षदों को किस कानूनी या प्रशासनिक आधार पर रोका गया था।
तिजारा नगर परिषद के चुनाव परिणामों में निर्दलीय पार्षदों की बड़ी संख्या पहले ही इस चुनाव को दिलचस्प बना चुकी थी। अब चेयरमैन चुनाव से ठीक पहले पार्षदों को रोके जाने के दावे ने मुकाबले को और अधिक चर्चा में ला दिया है।
नोट: पार्षदों को हरियाणा पुलिस द्वारा रोके या हिरासत में लिए जाने संबंधी विवरण यहां कांग्रेस नेताओं के दावे के रूप में प्रस्तुत किया गया है। पुलिस की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध होने पर स्थिति और स्पष्ट होगी।



